*गरीब कौन?*

             "गरीब कौन "
ओ भैया रिक्शावाले अपर बाजार चलोगे ?
हाँ बहन जी चलूँगा, कितना लोगे ?
30रु बहन जी लूँगा, ज्यादा बोल रहे हैं भाई साहब,
इतने में वह व्यंग्यात्मक लहजे में बोला क्या बहन जी आप लोग भी मोल भाव कर रहे हो,
पर आप ज्यादा बोल रहे हैं भाई साहब, सही किराया तो 20रु ही होता है,
पर अगले पल बारिश की वजह से अँधेरे की गहराई को नापते हुए बैठना ही ठीक समझी, और मन ही मन सोची की अगर जरुरी काम नहीं होता तो कभी न जाती,
अभी रिक्शा कुछ दूर चला ही था की वह बोल उठा- क्या बहन जी महंगाई आसमान छु रही है, और आपलोग अभी उसी ज़माने में जी रहे हैं, मई तब से रिक्शा चला रहा हूँ, जब समोसा आठ आने में मिलते थे, अब तो वह भी 10रु में मिलते हैं ।
मैंने यूँ ही पूछ लिया कहाँ से हैं और कहाँ रहते हैं भईया ? उसने बड़े ही गर्व से बताया की जो नया मॉल गलेक्सिया खुला है न वहीँ रहता हूँ कई सालों से वैसे मै हूँ बिहार का। वह अपने रॉब में ही बोले जा रहा था की बेटा कहता है काम छोड़ने को पर  मई अपनी मेहनत पे भरोषा करता हूँ ।मैंने कहा वाह आपका बीटा तो बहुत अच्छा है क्या करता है ? उसपे उसने बोला टेम्पो चलता है , साथ ही व्यंग्य भरे लहजे में मुस्कराते हुए बोला- हाँ बहन जी बोलता है काम मत कीजिये और खुद 3साल से मुझसे अलग रह रहा है । इस बात को कहते हुए दर्द उसके चेहरे पे साफ़ झलक रही थी । फिर हँस कर बोला - पर जानती हैं बहन जी उसके 3नो बच्चे 3नो टाइम मेरे ही तरफ खाते हैं, अब उन मशुमों से मई क्या बोलूं की उनका बाप मुझसे अलग हो गया है , यह बात कहते हुए बिल्कुल दार्शनिक लग रहा था वो जो की आज के यथार्थ को मानो शब्दों में लपेट कर बयान कर रहा हो ।
   आगे बात बढ़ाते हुए मैंने पूछा कितना काम लेते हैं भईया ? इसके जवाब में उसकी बातों से एक सफल व्यावसायिक का परिचय मिला मुझे , वह बोला बस यही 800रु से 1000रु प्रतिदिन यानि 25000से 30000 महीना ।और किसी तरह का इसमें झंझट भी नहीं है, न ही किसी की डांट- फटकार ही है ।साथ ही दीपावली में मै स्टॉल लगा कर इस बार 80,000रु का दिया और मूर्ति भी बेचा हूँ ।इस बार थोड़े महंगे थे दिए कुम्हार से 90रु सैकड़ लेकर 100रु सैकड़ बेचा हूँ । यानि 10%की मार्जिन पे ।
        मै उसकी बातें सुन मन ही मन मुस्करा रही थी
की ये तो बिना पढ़े ही व्यापार की सारी बारीकियों को बखूबी जनता है ।आगे वह बोला इस बार आज काली जी का आज विसर्जन नहीं हुआ है कई जगहों पे और कल भी नहीं होगा जानती हैं क्यों ?
मै बोली हाँ बारिश की वजह से और कल एतवार है तो खर दिन भगवती और बेत की विदाई नहीं होती इसलिए सोमवार को होगी । इसपर फिर से वही व्यंग्यात्मक मुस्कान में वह बोला नहीं बहन जी ऐसी बात नहीं है अब पूजा भी व्यापार हो गया है इतना पैसा लगा है पंडाल सजाने में तो कुछ दिन तो रखेंगे ही लोग, मुजगे तो यह बात पता ही नहीं थी, उसकी बातों से पहली बार मुझे इस बेस्ट का ज्ञान हुआ की ऐसा भी होता है ।
       इतना ही नहीं उसकी रूचि राजनीती में भी दिखी , आगे वह फिर से उसी व्यंग्यात्मक लहजे में बोला की मोदी जी ने इस बार पटाखों पर रोक लगा कर कितनों के पैसे बचा दिए , जो 10,000रु के पटाखे जलाते थे वो 1000रु में ही सिमट गए, बच गए न उनके 9000रु  ।और खुद बद्रीनाथ घूम रहे हैं टेलीविजन पर हम देखे हैं ।इस तरह उसने अपनी सम्पन्नता भी बता दी टीवी फ्रिज जैसी उपयोगी संसाधन भी उसके पास है ।
    तभी हमारी मंजिल आ गई और हम उसकी बातों से सोच में पड़ गए की आखिर गरीब कौन है ? ये रिक्शाचालक पानीपुरी वाले जी महीने के बिना ज्यादा इन्वेस्टमेंट जे 25000 से 35000 रु काम लेते हैं या मध्यमवर्गिये पढ़े लिखे वो लोग जो ए. सी में बैठअपनी शिक्षा पे गर्व करते हुए 7000 से 20000 तक में सिमट जाते हैं ??

                      ...........📝श्रीमती मुक्ता सिंह


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