ठान लिया मैने
नमस्कार 🙏जोहर🙏 खम्मागन्नी सा🙏😊 आज मैं बुलंद हौसले पे अपनी स्वरचित रचना प्रस्तुत कर रही हूं।जो कक आत्मविश्वास सड़ लबरेज़ है।हर परिस्थिति सर जूझने को तत्पर है।आशा करती हूँकि आप सभी को पसंद आएगी🙏 "ठान लिया है मैने " ठान लिया है मैने मंजिलों को पाऊंगी एकदिन चुनौतीओं पे है नज़र हमारी बाधाएं भी ना रोक पाएंगी। माना लक्ष्य है दुःस्कर अर्जुन का तीर चलाना होगा मंजिले हैं फूल सी तो फूल कांटो के बिना कहाँ खिल पाई है ये वक्त तू भी दिखा अपने सितम वर्ना अफसोस करेगा एकदिन क्योंकि सफलता के राही को ठोकरें कहां रोक पाएगी । जानती हूं फ़तह का सफ़र है पथरीला, उबड़-खाबड़ से भरा पर जफ़र के मुसाफ़िर को ये आफतों का टीला कहां रोक पाएगी श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 17/7/2020