आओ मिलकर, कुछ कोट्स
*आओ मिलकर" आओ मिलकर एक नया जहां बनाए चारों ओर है स्वार्थ का समंदर इसमें हम निस्वार्थ की चपू चलाए तुम्हारे साथ में सारा जहां है ये दोस्त आओ मिलकर नयी दुनिया बसाएं श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 28/5/2020 "कम से कम* ये मेरे ईश्वर इतनी सी मोहल्लत दे दे कि कम से कम देख सकूं अपनों को कोरोना से तो हमने लड़ लिया हंसते हंसते कम से कम विदा होऊं इस दुनिया से तो आंखों में अपनों की छवि और होठों पे मुस्कान हो श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 28/5/2020 * खालीपन * अपने खालीपन को भरते हैं हम तेरी यादों की तन्हाइयों से और दिल में आस जगाते है हम तेरे वादों के भरोसे पे श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 28/5/2020 *कांटों की चादर* मैंने हर परेशानी को दोस्त बनाना सीखा है क्यूंकि ये दुनिया बड़ी जालिम है राहों में रोड़े नहीं कांटों की चादर बिछाती है श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 28/5/2020