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कुछ खुशियों के पल

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नमस्कार🙏 जोहार🙏 खम्माघण्णी सा 🙏 बहुत दिनो बाद जब दोस्त एक दूसरे से मिलते हैं। तो उनके मनोभावों को चित्रित करने का प्रयास की हूं।आशा हक्क असपलोगों को पसंद आएगी। कुछ खुशियों के पल" आओ बिता लें कुछ खुशियों के पल एकदूजे के संग कुछ हम कहें,कुछ तुम कहो,यादों को रंगीन आसमां दे दूं लाल सुर्ख रंग ये,अहसास है एकदूजे के प्यार का, विश्वास का बहुत हुई दुनियादारी,रिश्तेदारी, बस अब दोस्ती के रिश्ते निभा लूं । आओ बिता लें कुछ खुशियों के पल एकदूजे के संग आसमान भी आज कर रहा चित्रकारी, मनोभावों के उत्साह का कंधे पे एक दूजे के हाथ रख, साथ निभाने का वादा तो कर लूं दिल की खुशियों से चेहरे हो रहे गुलाबी,धूप का तो बहाना है फिर न जाने वक़्त ले कौन सा करवट,वक़्त को आज हथेलियों में भर लूं । आओ बिता लें कुछ खुशियों के पल एकदूजे के संग बहुत दिनों से हमारी गुफ़्तगू भी थी झीने ओढ़नी लपेटे शर्माती सी आज खुलकर कहकहों से खुशियों के संसार सजा लूं । श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 19/9/2020

दोस्ती तोड़कर

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        *दोस्ती तोड़कर* मन में अजीब सी उलझने उठ रही हैं तुझे माफ़ करके भी ना जाने कैसी बेचैनी है कभी तुम मेरे दिल-ए-नूर थे ये दोस्त आज तेरे नजदीकियों से भी घबरा रही हूं। दोस्त हमे दो जिस्म एक जान बुलाते थे कभी आज तेरी हंसी में भी फरेब नज़र आता है मुझे ये दिल आज भी इस क़दर गुलाम है तेरा, कि तेरी एक मुस्कराहट पे न्योछावर हुए जाते हैं। मैंने तो सिर्फ तुमसे ही दिल लगाया था, पर तुम तो कपड़ों की तरह बदलते हो दोस्त मै तेरी दोस्ती के रंग में रंगी थी इस क़दर कि हर रंग छू कर मुझे हो जाता था बेअसर  पर तूने मुझे जमाने के हर रंग के दिखाए तेवर। तुझपे हर रंग निखरा,सिर्फ मेरा ही रंग रहा बेअसर मैंने तुमसे दोस्ती निभाई हर रिश्ते को तोड़ कर और तूने तो हर रिश्ते निभाए दोस्ती तोड़कर। श्रीमती मुक्ता सिंह रंका राज 28/5/2020