भारतवासी आपस में लड़ रहे


      * भारतवासी आपस में लड़ रहे*

हम भारतवासी आपस में ही लड़ रहे हैं,
अंग्रेजों  की  कुटनीति को खे रहे हैं...
अरे लड़ना है तो देश के लिये लड़ो,
जो सही है उसके साथ चलो...
जो गलत है उसको निकाल बाहर करो,
तभी तो हम भी कहलायेंगे  शहंशाह ,
दोस्तों इसी अहम् की लड़ाई में हमने खोया सारा खजाना,
कोहिनुर का हीरा हो ,जो बना किसी के ताज का शोभा,
और अरबों का खजाना जिसे लुट ले गये गोरे,
और हमे दे गये स्लम बस्ती का “तगमा”...
बदलना है तो  “सुचना तंत्र” को बदलो ...
लड़नी है तो सुचना तंत्र की मजबूती के लिए लड़ो,
“दरिद्र” से सूचना  “समृद्ध” बनो...
ना कि आपस में एक-दुसरे पर कीचड़ उछालो...
क्योंकि हमारी जमीं है बीरों की कर्मभूमी,
जहाँ अवतरित हुुुुई लक्ष्मीबाई,कल्पना,सुनीता,
बीर भगत सिंह,कपिल, आनंद, धौनी, विराट....
जिन्होनें गोरों को धूल चटाई...
विदेशों में भी देश की परचम लहराई ।


                       ........🎨श्रीमती मुक्ता सिंह

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