"महारानी पद्मावती और चौथे स्तम्भ का कर्तव्य"

 "महारानी पद्मावती और चौथे स्तम्भ का कर्तव्य"



शौर्य और बीरता से ओत-प्रोत हमारी देवी माँ पद्मावती आज एक तुच्छ मानसिकता वाले निर्देशक की धनलोलुपता और सस्ती मनोरंजन को परोसने की परिचलन की परिभाषा बन्ने को प्रस्तुत हैं , एक चित्रपट के रूप में । आज के ये निर्देशक माँ पद्मावती के समय के राघव से कम नहीं । जो अपनी ओछी मानसिकता के कारन परम पूजनीय हमारे सतीत्व के प्रतिक माँ पद्मावती को 16000 क्षत्राणियों के साथ जोहर करने को मजबूर कर दिया था । वैसे ही आज के समय में निर्देशक महोदय लीला भंसाली जी हमारे गौरव को अपनी धनलोलुपता के कारण तोड़-मडोड कर पेश कर रहे हैं और हम भारतीयों की मान-मर्यादा को ठेस पहुंच रहे हैं । आज तक जितनी भी ऐतिहासिक फ़िल्में बनी हैं, सभी में हमारे इतिहास को कलंकित दिखाया गया है ।चाहे वह जोधा-अकबर की कहानियां हों , या अभी कुछ महीनों पहले रिलीज हुई "बाजी राव मस्तानी" फ़िल्म हो ।क्या इसमे महारानी काशी बाई की महानता को नहीं दिखा सकते थे, या बाजी राव जी की वीरता को जो किसी भी युद्ध में नहीं हारे को प्रमुखता नहीं दे सकते थे ?
   आज भी माँ पद्मावती के राज्य में उनकी मंदिर बनी हुई है ।और माँ पद्मावती सिर्फ अपने राज्य में ही नहीं अपितु पुरे भारतवर्ष की देवी माता हैं ।उनमे उतना तेज था तभी तो अग्नि भी उन्हें शीतल लगीं ।अगर हमारी एक ऊँगली जल जाये तो दर्द से हम बिलबिला जाते हैं ।और वह तो सशरीर अपने को अग्नि के हवाले कर दीं ।

और हमारे इतिहास में तो ऐसे अनेको उदहारण यत्र-तत्र बिखरे पड़े हैं जिनके साक्ष्य मिटाने की भरपुर कोशिस की गई है ।माँ हाड़ा रानी जिन्होंने अपने पति को अपने मोहपाश से मुक्त करने और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित करने हेतु खुद अपना सर कलम कर पति को मोहबंधन से मुक्त किया था ।


धन्य हैं पूज्नीय शिवा जी महाराज की माता, महाराणा प्रताप जी की माता जिन्होंने अपने सुपुत्र को देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की शिक्षा दी । जीजाबाई, रानी लक्ष्मीबाई, कमलाबाई जैसी वीरांगना ।

अब हम अपने मौलिक विषय शौर्य वीरता और अप्रतिम सुंदरता की मूरत देवी माँ पद्मावती की बात करते हैं। कल मै  रास्ट्रीय न्यूज़  चैनल "आजतक" पर लाइव रिले किया जा रहा कार्यक्रम देख रही थी , जिसकी संवाददाता "अंजना ओम कश्यप" जी वहां जुटी संभ्रांत महिलाओं से बोला की अच्छा तो है की इससे आपके इतिहास को जाना जायेगा । पर मै उनसे पूछना चाहती हूँ की एक देवी को नर्तकी बनाने में कौन से इतिहास को जाना जायेगा ।क्या उन्हें नहीं पता है की जिनके अक्स को भी विदेशी आतताई ख़िलजी सीधे तौर पे नहीं देख पाया था, वो क्या सपने में भी उन्हें देखने से पहले उसकी रूह नहीं कांपती होगी । तो घूमर करते देखना तो दूर की बात है । क्या कोई इतना सच्चरित्र कल्पना कर  सकता है ? और वह तो इतना डरपोक था की हमारी संस्कृति "अतिथि देवो भव" को कलंकित करते हुए "महाराज रत्नसेन" को धोखे से बंदी बनाया था।
और पहले विदेशी आक्रमणकारियों से अपनी अस्मिता को बचाने के लिए संभ्रांत परिवार की महिलाएं जौहर को अपना लेती थीं। क्योंकि यह मार्ग तो माता सती का दिखाया हुआ है। जब माता सती का अपमान उनके ही पिता के सभा में हुआ तो वो अपनी मान -मर्यादा की रक्षा के लिए भगवन अग्निदेव का आह्वाहन कर अपने को उसमे स्वः कर दी थीं। सैयद इसीलिए जौहर अपनाने वाली वीर माताओं को सती माता ही कहा जाता है ।
और इसी परम्परा को निभाते हुए हमारी पूजनीय महारानी माता पद्मावती ने जौहर को अपनाया ।महाराणा प्रताप के समय भी क्षत्राणियों ने जौहर किया था और हमारे बीर योद्धा उनके जौहर के भस्म को माथे से लगा केसरिया वस्त्र धारण कर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिये। क्या ये हमारा स्वर्णिम इतिहास को 3 घंटे में समेट पायेंगे ?
आज जब फिर से जरुरत है शौर्य गाथा लिखने की तो हमारी माता को घूमर करते दिखाये और विदेशियों को हंसने का मौका दे क्या यही इनका अभिप्राय है, योगदान है?
हमारे इतिहास में शौर्य की हजारों उदाहरण भरे -पड़े हैं ।और अभी के समय में हमारे समाज के चौथे स्तम्भ को चाहिए की उन गाथाओं से हमारे युवा को अवगत करवाएं। ताकि वो अपने इतिहास पे गर्व करें और उनमे देशभक्ति की भावन उमड़ने लगे। साथ ही पुरे संसार के सामने हमारे स्वर्णिम इतिहास को रखें, जिससे हमारे देश का कद ऊँचा हो न की पूजनीय शौर्यमयी अप्रतिम सुंदरता से ओत-प्रोत महारानी पद्मावती को घूमर करवा कर हमारे देश की जनता की भावन को आहत करे ।और सस्ती मनोरंजन परोस अपनी तिजोरी भरे।

                  ................📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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