ज़िन्दगी की जंग

                "ज़िन्दगी की जंग"

दोस्तों की महफ़िल मिलती है खुशनशिबों को,
दुश्मनो की जागीर मिलती है ज़हनसिबों को,
तभी तो कमजोर दिल वाले नहीं लड़ पाते जंग।

मै बैठी थी खुशियों की महफ़िल में,
व्यस्त थी ज़िन्दगी की अठखेलियों में,
तभी ज़िन्दगी की धुप-छांव में एक पल ठिठकी,
एक ठोकर से लड़खड़ाए मेरे कदम,
एक पल को हुआ मुझे एहसास ,
कि शायद हारने लगी हूँ ज़िन्दगी की जंग,
यह एहसास मेरे होने लगे थे तंज़,
विचलित सी दोराहे पे खड़ी थी, किंतव्यविमूढ़,
कभी देखती थी बाएं, कभी देखती दायें,
लोगों के दोहरे व्यव्हार से थी आहत,
इस झुंझलाहट में ज़बान ने भी छोड़ा साथ,
कर्कशा बन बैठा था ज़बान,
सभी के नज़रों में उठने लगा था सवाल।

तभी दिल के एक कोने से आई आवाज,
दोराहे ही तय करते हैं मंजील की राह,
तंज अहसास ही देते है सबल ताकत,
विश्वास से तो दुश्मन भी बन जाते हैं दोस्त,
क्योंकि ज़िन्दगी की जंग मिलती है सभी को,
किसी को कम तो किसी को ज़्यादा,
किसी ने सच ही कहा है-
आग में तप कर सोना बनता है कुंदन।

              ............📝श्रीमती मुक्ता सिंह




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