फ़िजा को क्या हो गया है ?

फिज़ा को क्या हो गया है?

आज ये फ़िजा को क्या हो गया है?
जो कलियों की मुस्कान की थी वज़ह,
आज ऊन कलियों की मुरझाने का सबब बन गयी है।

भारत माता भी देखती होगीं ,
अपने कपूतों की करतूत,
 रोती होंगी खून के आंसू मन-ही-मन,
ना मिटनेवोले दर्द से कराहती होंगीं ।

आज मन में उठते हैं सवाल,
 क्या यही सपना देखा होगा ,
आजादी के रखवालों ने?
क्या इसी आजादी के लिए,
शहीदों ने दिया होगा बलिदान?

गैरों ने बेदर्दी से कलियों को कुचला तो क्या कुचला,
अब तो अमन के रखवाले भी बन गए हैं अभिशाप,
माता रूपी दुर्गा-काली को पूजनेवाले,
बन बैठें हैं रावण, दुर्योधन,
क्या अब देश में सुरक्षित रह पाएंगी मां-बहने?

ये फ़िजा को क्या हो गया है ?
धुंआ-धुंआ सा फैला है वतन में,
दोस्तों के दिलों में भी है बेईमानी,
अपना-पराया भूल गए हैं सभी,
परिचित चेहरे हो गए हैं अपरिचित।

चेहरे-पे-चेहरे हैं कई चेहरे,
लगान का स्वरुप बदला,
पीसी का हो गया है बोलबाला,
जैसे किसी ने धोती छोड़ पहना हो जीन्स।

स्कूलों में भी वार्षिक फीस का बढ़ा है चलन,
बच्चे बलिदानों का इतिहास जाने या न जानें,
पर अंग्रेजी के शब्दों पर हो मजबूत पकड़।

ये फ़िजा को क्या हो गया है?

              ............📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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