लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का योगदान

लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का योगदान
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         लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का बहुत ही योगदान हो सकता है । क्योंकि युवा शक्ति किसी भी देश और समाज की रीढ़ होती है, साथ ही यही युवाशक्ति चाहे तो देश और समाज को नए शिखर पर ले जा सकती है ।क्योंकि युवा देश के वर्तमान के साथ- साथ भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं ।एक ओर जहाँ युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं, तो वहीँ यही युवा गहन ऊर्जा और उच्च महत्वकांक्षाओं के साथ भविष्य के इंद्रधनुषी स्वप्न के अकांछी होते हैं ।किसी भी देश के समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही होता है ।
             संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। यहाँ के लगभग 60 करोड़ लोग 25 से 30 वर्ष के हैं। यह स्थिति वर्ष 2045 तक बनी रहेगी। विश्व की लगभग आधी जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है । इसलिए हमारा देश भारत अपनी बड़ी युवा जनसंख्या के साथ देश को अर्थव्यवस्था की नई ऊंचाई पर ले जा सकता है । परंतु इस ओर भी ध्यान देना होगा कि आज देश की बड़ी जनसंख्या बेरोजगारी से जूझ रही है । भारतीय सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में बेरोजगारों की संख्‍या 11.3 करोड़ से अधिक है। 15 से 60 वर्ष आयु के 74.8 करोड़ लोग बेरोजगार हैं, जिस कारण हताश युवा देश में हो रही 70 प्रतिशत आपराधिक गतिविधियों में युवाओं की संलिप्तता रहती है ।
           वहीं पश्चिमी सभ्यता के चकचौन्ध से प्रभावित हुए आज के युवाओं में धैर्य की कमी के साथ हर वस्तु प्राप्त करने की जल्दी या यूं कहें की उतावलापन है ।जिसके लिए वे कठिन परिश्रम की बजाय शॉर्टकट खोजते हैं ।भोग विलास और आधुनिकता की चकाचौंध, उच्च पद, धन-दौलत और ऐश्वर्य का जीवन उन्हें अपनी ओर आकर्षित करता है ।जिस कारण वे मानसिक तनाव के भी शिकार हो रहे हैं ।

        और इसके लिए समाज को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए युवाओं की इस नकारत्मकता को सकारत्मकता में परिवर्तित करना होगा । तभी ये देश के लोकतंत्र के शशक्तिकरण में पूर्ण रूप से सहयोग कर पाएंगे ।
        और ऐसा मेरा मानना है की यदि युवाओं का सही मार्गदर्शन नहीं किया गया तो,  हमारे देश के युवा मानव संसाधनों का भारी राष्ट्रीय क्षय होगा । इसलिए युवा शक्ति की क्रियाशीलता को देश की विकास परियोजनाओं में भागीदार बनाना होगा । तभी ये  किसी चुनौती का सामना करने में पीछे नहीं रहेंगे ।वैसे भी हम आये दिनों खबरों के माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं की प्राकृतिक आपदाओं के समय चाहे भूकंप हो या बाढ़, युवाओं ने सदैव आगे बढ़कर पीड़ितों की सहायता में दिन-रात एक कर दिया है ।
अगर युवाओं के उचित मार्गदर्शन दिया जाये और उनकी क्षमता का सदुपयोग किया जाए ।  उनकी सेवाओं को प्रौढ़ शिक्षा तथा अन्य सरकारी योजनाओं के तहत चलाए जा रहे अभियानों में प्रयुक्त किया जाये ।तो वे सरकार द्वारा सुनिश्चित लक्ष्यों की प्राप्ति के दायित्व को वहन कर सकते हैं ।तस्करी, काला बाजारी, जमाखोरी जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने में, राष्ट्र निर्माण के कार्य में उन्हें लगाया जाये,  तो वे राष्ट्र निर्माण और लोकतंत्र के शशक्तिकरण में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे । युवाओं को उनकी क्षमता और योग्यता के अनुसार ऐसी असंख्य योजनाएं, परियोजनाओं और कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाये, जिनमें वे समाज में समाजिक, आर्थिक और नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें । वे समाज में प्रचलित कुप्रथाओं और अंधविश्वास को समाप्त करने में भी काफी सहायक सिद्ध हो सकते हैं । क्योंकि देश में दहेज प्रथा के कारण न जाने कितनी ही महिलायें दहेज़ की बेदी पर बली चढ़ जाती हैं ।
       इस तरह हम लोकतंत्र के शशक्तिकरण में युवाओं का योगदान ले सकते हैं ।
....📝श्रीमती मुक्ता सिंह🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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