टमाटर की चटनी

                       "टमाटर की चटनी"

          आज जिओ चैट पे टमाटर की चटनी की रेसिपी देख  हॉस्टल की उन दिनों की याद ताज़ा हो गई । जब हम सभी हॉस्टल के खाने से ऊब गए थे और ठंढ का मौसम था ।कृष्णा भैया हॉस्टल के इतने अच्छे मेनू को भी अपनी कामचोरी के कारन बिगाड़ दिए थे ।सब्जी में कोई स्वाद ही नही रहती थी ।हमारे घर से भी लाये सारे नाश्ते धीरे धीरे ख़त्म हो रहे थे।
              हम सभी छः दोस्तों का ग्रुप था । सभी के विषय अलग -अलग थे पर सेमेस्टर और रूम एक ही थे ।हमे वार्डन अलग भी रखना चाहती तो हम अलग अलग बेड की सुविधा छोड़ कर तीन बेड एक साथ मिलाकर छः दोस्त एक साथ रह लेते थे ।इतना अगाध हमलोगों में अपनापन और प्रेम था ।इसीलिए हमलोग हॉस्टल में सुपर सिक्स के नाम से मशहूर हो गए थे ।
          हम सभी दोस्तों ने सोचा की अब क्या किया जाये । ये कृष्णा भैया के भरोसे तो हम भूखे ही रह जायेंगे ।और हमारा घर से लाया सामान भी खत्म हो रहा है ।तभी गली  में सब्जी बेचने वाले ने आवाज लगाई सब्जी ले लो सब्जी, ताज़े खेत से लाई हुई सब्जी ।टमाटर, बैगन ,आलू ले लो ।यह सुनते ही हम सभी के आँखों में चमक आ गई , क्योंकि हमे तोड़ मिल चूका था ।हम सभी एक साथ बोल पड़े टमाटर ।और हम तुरंत ही सब्जी वाले को खिड़की से ही आवाज दे कर रोक लिए और एक किलो टमाटर और धनिया पत्ता हरा मिर्च लहसून उस से ले लिए ।शाम को जब हम शाम के नाश्ते के लिए मेस में गए तो आधा टमाटर कृष्णा भैया को देकर आ गए की इसे खाना बनाते समय आग पे पक्का दीजियेगा ।रात में जब खाना के लिए मेस में बुलाया गया तो हम सभी टमाटर की चटनी को लेकर उत्साहित थे ।बहुत खुश हो कर गए हम सभी ने टमाटर की चटनी बना कर गर्म गर्म रोटी के साथ बहुत दिनों के बाद मन से खाना खाया।अब हमारी ये रोज की एक आइटम हो गई जहाँ  हमलोग दो रोटी भी नहीं खाते थे ,अब चार -चार रोटी खाने लगे । अंत में कृष्णा भैया से नहीं रहा गया तो उसने एक दिन बोल ही दिया की मै टमाटर पक्का कर नहीं रखूँगा ।मैम मना की हैं ।दूसरे दिन हमलोग मैम के पास पहुँच गए ।मैम क्या आपने कृष्णा भैया को टमाटर पकाने मना की हैं।तो मैम बोली नहीं तो मै क्यों मना करुँगी ।वह रोटी बनाने के डर से बोल रहा होगा ।मैम उनको बोलाकर खूब डांट लगाई ।इस तरह हमलोगों ने हॉस्टल के खाने को मजेदार बनाया ।आज वो बातें याद आने पे अकेले में भी चेहरे पे मुस्कान आ जाती है।क्या दिन थे वो भी ।
         ............📝श्रीमती मुक्ता सिंह
        

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