पैसों का बोलबाला

              "पैसों का बोलबाला"

दुनिया को बदलते देखा है,
पैसों को सर चढ़ बोलते देखा है,
पैसों से तौली जाती है रिश्तेदारी,
पैसों से ही है अहमियत सारी ।

पैसों ने आँखों पे बांधी ऐसी पट्टी,
माता को भूले, पिता को भूले,भूले नातेदारी,
बस हम दो हमारे दो में सिमटी दुनिया सारी।

लिहाज भी लोग भूले पैसों के आगे,
छोटा हो गया बड़ा, बड़ा हो गया छोटा,
पैसों की अहम् है भैया सबसे भारी ।

पर कौन समझाए अक्ल के इन अंधों को,
पैसों से नहीं मिलती खुशियाँ और नातेदारी,
नहीं टिकते पैसों के चाटुकार ज़िन्दगी भर,
रिश्ते की अहमियत टिकती उम्र सारी ।


             ...........📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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