जरा कदम तो बढ़ाओ

"जरा कदम तो बढ़ाओ"

जिंदगी की सफ़र में न जाने कितने पड़ाव आये,
न जाने कितने कारवां गुजरते गए,
हम वही थे , और वहीँ ठहरे ही रह गए,
लाखों तूफां आये ज़िन्दगी  की सफ़र में,
खुशियाँ ठहर गई ,और तूफां गुजरते गए ।

हमारी मंजिल थी सिर्फ रिश्तों की अहमियत,
मंजिलों के बिच कितने ही तूफां में थी कश्तियाँ,
नाविक मिलते गए और किनारे पास आते गए ।

जिंदगी की सफ़र मे ख्यालों में ना समय गवाओं
मंजिल मिलेगी ,तुम जरा कदम तो बढ़ाओ,
ये धरती -गगन सभी हैं तुम्हारे हौसले के सहारे,
तूफां यूँ ही गुजर जायेंगे,मंजिले पास आती जाएँगी,
परेशानियों को भूल,तुम जरा तो मुस्कराओ ,
ज़िन्दगी होगी आसां,तुम जरा कदम तो बढ़ाओ।
         ........📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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