गहने

   "गहने"
     
                 हम सभी एक साथ दीवानखाने में बैठे हुए थे । और यूँही गपबाजी इधर-उधर की चल रही थी ।हंसी मज़ाक का माहौल था,सभी एक दूसरे के टांग खिचाई कर रहे थे।और टेलीविज़न पे एक धारावाहिक "रिश्ते नए लिखेंगे "चल रही थी ।उसमे एक किरदार ने काफी गहने पहन रखे थे ।जिसे देख हम सभी मज़ाक के मूड में थे। सभी अपने अपने विचार व्यक्त कर रहे थे ।इतने में ही हमारे पतिदेव बोल उठे की इन आधी आबादी को अगर गहने के नाम पे सोने की ईंट भी लेटेस्ट फैशन कह कर दे दिया जाये तो वे ख़ुशी से फूली नहीं समायेंगी।और पहन कर काफी खुश होंगी।
                 अब भला मेरे सामने आधी आबादी को निशाने पे लिया जा रहा था और मै बिना जवाब दिए या बिना अपना पक्ष रखे चुप भी नहीं रह सकती थी।मै बोली बिलकुल सही कहा आपने। पर क्या उसके पीछे की छुपी भावना को जानने की कोशिश की है आपलोगों ने कि, क्यों खुश हो जाती हैं महिलाएं गहनो के नाम पे। दरअसल इसके पीछे भी उनकी परिवार के प्रति चिन्ता और सुख की ही कामना होती है। अब चौकने की बारी उन सभी की थी।सभी ने मज़ाक भरे लहजे में मुझसे सवाल किया की कैसे ?
                तब मैंने अपने पक्ष को विस्तार देते हुए उन्हें समझाया ।की महिलाओं के ऊपर घर सवारने से लेकर विकट परिस्थितियों में भी सम्मान बचाते हुए सुचारू रूप से घर चलाने की जिम्मेवारी होती है।और हर किसी के जीवन में एक पल तो ऐसा आता ही है कि सारे रास्ते बंद होते हैं और हताशा मुंह बाये खड़ी होती है,प्रतिष्ठा किसी के सामने झुकने नहीं देती है।ऐसी स्थिति में आधी आबादी जितने ख़ुशी से गहने पहनती है ,उतने ही ख़ुशी से उसे उतार कर अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा भी करती है।
             और इसका उदाहरण आज़ादी के समय हमारा देश भी बना था, जब हमारी मातृभूमि के लिए पुरे देश से आधी आबादी ने अपने सारे गहने उतार कर देश को समर्पित कर दिए थे ।
             इसीलिए आधी आबादी गहनों को पूंजी मानती है। जो कठिन अवसर पर उसके सबसे बड़े दोस्त हो सकते हैं ।इसीलिए उन्हें गहने इतने प्यारे होते हैं ।क्योंकि उसमे उन्हें अपना सम्मान और स्वाभिमान नज़र आता है ।
              यह मेरे विचार है ।वैसे आपलोग अपने विचारों के साथ रह सकते हैं।पर सही मायने में गहनों का औचित्य हमारी नज़रों में यही है ।सभी चाहते हुए भी मेरी बातों को काट ना सके। क्योंकि उनका भी दिल जानता था कि मेरी बातों में सच्चाई है जिसे काटा नहीं जा सकता ।
                     .............श्रीमती मुक्ता सिंह

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