महफ़िल में अकेले"

       "महफ़िल में अकेले"


भरी महफ़िल में हम अकेले थे,
बहुत कोशिश किये की ना याद करूँ,
पर भूलते तब तो तुम्हे न याद करते।

चारो ओर थी संगीत की महफ़िल,
बहारों की खुशबु थी भरी,
सज का धुन मन के तार छेड़ रही थी,
खुशियों का छलक रहा था पैमाना,
फिर भी महफ़िल में थे अकेले हम।

मन में चल रहा था यादों का कारवां,
ठहाकों से महफ़िल थी गुलज़ार,
पर बिन तेरे महफ़िल में थे अकेले हम।

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