समाज का मुखोटा

           "समाज का मुखोटा"
लोग कहते हैं,ज़िन्दगी के मायने बदल गए हैं,
पर मै कहती हूँ मायने नहीं, बस मुखोटा बदल गया है,
सदियों पुराने मायने, आज भी वहीँ के वहीँ हैं।

पहले भी राम गए बनवास ,और दानव किये राज,
आज भी राम को मिलता है बनवास,राक्षसों को राज,
पहले भी हरित हुई थीं माता सीता,
आज भी दमणियां चढ़ती हैं बलि समाज में ।

न कल बदला था समाज,न आज बदलेगा,
बस बदल गया है, मुखोटा समाज का।

           .........📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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