वक़्त
"वक़्त"
वक़्त समय का पहिया है,जो गुजर जाता है,
वक्त किसी की जागीर नहीं,वो गुजर जाता है,
अच्छा हो या बुरा,हरवक्त वक़्त गुजर जाता है।
क्योंकि जो गुजर गया वो वक़्त है,
जो ठहर गया वो लम्हा है यादों का,
अच्छे-बुरे वक़्त गुजर जाते हैं परछाइयाँ छोड़े,
बुरे वक्त में ही दोस्तों की होती है पहचान,
अच्छे वक़्त में तो सभी होते हैं अपने ।
हौसलों की भी आजमाइश करती है वक़्त,
कि कितने गहरे पानी में टिकते है हम,
छिछले पानी में तो सभी शेखी बघारते हैं।
वक़्त किसी के लिए न रुका है न रुकेगा,
उसकी फितरत में है बदल जाना हरपल,
पीछे छोड़ जाता है अच्छी-बुरी यादों का खजाना।
पर हम वहीँ ठहरे हैं,जहाँ तुम छोड़ गए थे,
मौसम बदला, लोग बदले, बदल गया सारा जहां,
पर ये वक़्त हम आज भी वही हैं ,जो कल थे,
हम वहीँ ठहरे हैं जहाँ तुम छोड़ गए थे,
शायद हम लम्हा बन गए हैं यादों का,
तुम वक़्त ठहरे जो गुजर गए हरवक़्त की तरह।
.........📝श्रीमती मुक्ता सिंह
वक़्त समय का पहिया है,जो गुजर जाता है,
वक्त किसी की जागीर नहीं,वो गुजर जाता है,
अच्छा हो या बुरा,हरवक्त वक़्त गुजर जाता है।
क्योंकि जो गुजर गया वो वक़्त है,
जो ठहर गया वो लम्हा है यादों का,
अच्छे-बुरे वक़्त गुजर जाते हैं परछाइयाँ छोड़े,
बुरे वक्त में ही दोस्तों की होती है पहचान,
अच्छे वक़्त में तो सभी होते हैं अपने ।
हौसलों की भी आजमाइश करती है वक़्त,
कि कितने गहरे पानी में टिकते है हम,
छिछले पानी में तो सभी शेखी बघारते हैं।
वक़्त किसी के लिए न रुका है न रुकेगा,
उसकी फितरत में है बदल जाना हरपल,
पीछे छोड़ जाता है अच्छी-बुरी यादों का खजाना।
पर हम वहीँ ठहरे हैं,जहाँ तुम छोड़ गए थे,
मौसम बदला, लोग बदले, बदल गया सारा जहां,
पर ये वक़्त हम आज भी वही हैं ,जो कल थे,
हम वहीँ ठहरे हैं जहाँ तुम छोड़ गए थे,
शायद हम लम्हा बन गए हैं यादों का,
तुम वक़्त ठहरे जो गुजर गए हरवक़्त की तरह।
.........📝श्रीमती मुक्ता सिंह
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