ख़्वाहिशें

    "ख़्वाहिशें"
लफ़्ज़ बड़ा सलीके का है 'ख़्वाहिशें',
अर्थ बड़ा गहरा है इसका 'ख़्वाहिशें',
ख्वाहिशों पे ना तो बनी है सीमारेखा,
न ख्वाहिशें पालने को चाहिए इज्ज़ाजत।

ख्वाहिशों की न तो कोई मंज़िले हैं,
ना ही ख़्वाहिशें पूरी होने का वादा,
ये तो देखि जाती हैं अधखुली पलकों से,
कभी छोटी तो कभी बड़ी होती हैं ख़्वाहिशें,
बस इसके होने का अहशास भर देता है उमंग।

माँ-बाप के आँखों का तारा बन्ने की ख्वाहिश,
चाहे स्कूल में अव्वल आने की ख़्वाहिश,
थोड़े बड़े हुए तो आसमान को छूने की,
थोड़े और बड़े हुए तो चाँद-तारे तोड़ लाने की,
अनेको ख़्वाहिशों की अनेको हैं मंजिले ।

पर समय के साथ ख़्वाहिशें बंद हो जाती हैं,
समुद्र की लहरों सा उफ़नती रहती हैं अंदर,
बहार शीतल सी शांत दिखती हैं ख़्वाहिशें,
जैसे कैद हो घर आँगन में,देहरी पे हो पहरेदारी,
दुल्हन की घूँघट सी होती हैं ख़्वाहिशे,
बाहर से ढंकी और अंदर से उत्सुकता से भरी ।
......................📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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