यादों में
"यादों में"
जब भी आँख बंद करूँ बस तुम ही तुम हो,
यादों में भी बसेरा है बस तुम्हारा ही,
सज़दे में भी बस नजऱ आता है तेरा चेहरा।
तुम से है बस इतनी सी आरज़ू,
सजदे में न याद कर मुझको,
बस यादों में दे दे बसेरा मुझको।
समय की तरह ना रुक मेरे लिए,
पर ओस की तरह, कुछ पल दे दे मुझको,
अच्छी बात है कि, यादों की जंजीर नहीं तेरे पैरों में,
पर दुःख है मुझे, कि यादों के पन्नों में भी नहीं मै।
कभी हमख्याल थे हम-तुम,
आज ख्यालों से भी है दुश्मनी हमारी,
हमारी मंजिलें पूरी होती थी तुमसे मिलकर,
आज टेढ़े-मेढ़े पगडंडियों की मंजिले भी नहीं।
ये कैसा हवा का झोंका आया है,
लगता है जैसे तुम्हारी ख़ुशबू हो फिजाओं में,
पर इन हवाओँ की ये साजिशें हों ये जैसे।
.............📝श्रीमती मुक्ता सिंह
जब भी आँख बंद करूँ बस तुम ही तुम हो,
यादों में भी बसेरा है बस तुम्हारा ही,
सज़दे में भी बस नजऱ आता है तेरा चेहरा।
तुम से है बस इतनी सी आरज़ू,
सजदे में न याद कर मुझको,
बस यादों में दे दे बसेरा मुझको।
समय की तरह ना रुक मेरे लिए,
पर ओस की तरह, कुछ पल दे दे मुझको,
अच्छी बात है कि, यादों की जंजीर नहीं तेरे पैरों में,
पर दुःख है मुझे, कि यादों के पन्नों में भी नहीं मै।
कभी हमख्याल थे हम-तुम,
आज ख्यालों से भी है दुश्मनी हमारी,
हमारी मंजिलें पूरी होती थी तुमसे मिलकर,
आज टेढ़े-मेढ़े पगडंडियों की मंजिले भी नहीं।
ये कैसा हवा का झोंका आया है,
लगता है जैसे तुम्हारी ख़ुशबू हो फिजाओं में,
पर इन हवाओँ की ये साजिशें हों ये जैसे।
.............📝श्रीमती मुक्ता सिंह
Memories are the best moments of our life
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