बली चढ़ी है नारी"

   "बली चढ़ी है नारी"

हर युग की एक ही कहानी ,
समाज की बेदी पर बली चढ़ी है नारी,
भारत माता हैं पर भारत की नारी है अबला,
हर जगह शोशित होती हैं सिर्फ नारी,
खुबसूरत हों तो जानवरों का शिकार बनती ,
बदसूरत हों तो परिवार पर बोझ बनती है ,
हर युग में समाज की बेदी पर बली चढ़ती है नारी,
घर को सँभालने वाली हर गलती की है जिम्मेवार,
नारी का है नही है कोई अपना अस्तित्व,
नदी की तरह सागर में मिल सागर जैसी बन जाती।
       ......................📝श्रीमती मुक्ता सिंह

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