उनकी आँखें


     "उनकी आँखें"

शब्द मौन हैं तो क्या
उनकी आँखे बोलती हैं
पढ़ने वाला नज़र चाहिए ।

प्यार करने के भी अलग अलग सलीके हैं,
आँखों में नमी हो तो, गम हो जरुरी नहीं,
खुशियों में भी सैलाब बहा करते हैं ।

आँखों-आँखों से बात व् मुलाकात तो हो जाती है,
लेकिन बड़ा मुश्किल होता है वह पल,
जब किसी की ख़ामोशी सवाल कर जाती है।

उनकी आँखों के अंदाज़ बड़े ही गहरे हैं,
उन दिलकश आँखों के ख्वाब बड़े गहरे हैं,
छुप-छुप के न जाने क्या देखते हैं,
जैसे कोई खज़ाना छुपाने की हो कोशिश,
और नज़रे झुकाये मुस्कराते रहते हैं ।

उनकी आँखों की तारीफ़ है बमुश्किल,
झील सी आँखों में समंदर छिपाये बैठे हैं,
चेहरे पे मुस्कराहट, आँखों में तूफान हो जैसे,
लोगों में खुशियों के तोहफे लुटाए बैठे हैं ,
उनकी आँखों की तारीफ़ में क्या कहूँ,
उसके लिए शायरों के लफ्ज कम पड़ जाते हैं।

रात की गहराइयों और मेरी तन्हाइयों में,
उनकी आँखों के वो समंदर याद आते हैं,
और उनकी मजबूरी और कमी याद कर,
हलके-हलके पलकों से ढल जाती हैं ।


                     📝श्रीमती मुक्ता सिंह

Comments

Post a Comment