दोस्ती है अनमोल

दोस्ती है अनमोल

दोस्ती हर किसी से नहीं होती
पर जब होती है, हर ख़ुशी से बड़ी होती है,
जहाँ न कोई मतलब का मोल होता है ,
बस दोस्ती में जज़्बा अनमोल होता है ।

दोस्ती से बड़ी ना तो कोई नाता है,
रिश्ता ये अनमोल प्यारा सा लुभाता है,
दोस्ती में हर सुख-दुःख एक दूजे का होता है,
स्वार्थ से पर ये एक अनमोल नाता है ।

हर पल में सच्चे दोस्त की याद आती है,
उसकी नसीहत और खिलखिलाहट याद आती है ।
एकदूजे के चेहरे के हरेक भाव को समझ जाना,
बिन कहे ही एकदूजे की बातों को समझ जाना ।

आज भी उन गलियों से जब गुजरती हूँ,
तुम्हारी दोस्ती के हरेक रंग से खुद को भिगोती हूँ,
वो नसीहत वो खिलखिलाहट,
वो धीरे से दिल की बातें शेयर करना,
वो फुचके की चटपटे स्वाद,
और एक अलग से सुखा चटपटा पापड़ी की जिद,
वो ठंढ में ठेलेवाले चाय की चुस्की,
और शाम के गर्म समोसे और पापड़ी की चाट,
आज भी गुजरती हूँ जब उधर से,
अनायास ही पैर मुड़ जाते है उस खोमचे पे,
और मन ही मन मुस्करा देती हूँ तुम्हे याद कर,
पर वो स्वाद नहीं आता,
जिसकी तारीफें करते थे हम ।


समय बदला रिश्ते बदले पर न बदली दोस्ती हमारी,
आज भी रिश्ता दिल से निभाते हैं हम,
खिंचे से चले आते हैं दोस्ती की याद में,
ज़माने ने लगाया कितने इल्ज़ाम हमपे,
पर न हम बदले न बदली दोस्ती हमारी,
क्योंकि स्वार्थ से परे होती है सच्ची दोस्ती,
आज भी तुमपे हक़ ज्यादा समझते है हम,
दूसरे को अपने से कम आंकते हैं हम,
ये दोस्त मेरी सदा खुश रहो यूँही,
खुशियों से भरा हो दामन तुम्हारा,
क़दमों में बिखरे हो सफलताओ की फूल ,
यही दिल से दुआ है हमारी ।


📝📝📝📝श्रीमती मुक्ता सिंह



Comments

  1. बहुत सुन्दर काव्य रचना 🌹💞🌹

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