जिंदगी है बड़ी वेवफा
जिंदगी है बड़ी वेवफा
जिंदगी तू है बड़ी वेवफा,
खुशियाँ तो मिलती थोड़ी,
गमों से है सजा जहाँ,
ख्वाहिशें तो हसीन हजारों,
पर मुकम्मल जहाँ है थोड़ी,
खुशियों की आहटें हैं धीमी,
गमों का है जहाँ बड़ा।
बहुत खुश थे हम ये जिंदगी,
आँखे मूंदे चल रहे थे मखमली घासों पे,
अचानक से काँटो से छलनी हो गए पांव,
अभी सम्भले भी न थे की ठोकर लगी ,
गिरे तो पथरीली जमीं थी ।
बहुत गुमान था अपने प्यार पे हमे,
पर वो तो था बंद मुट्ठी की रेत,
जिसे जितना संभाले उतना ही फिसले,
बस खुशियाँ हैं मेरी गीली रेत ,
जो बस उतना ही देर मुट्ठी में बंद है,
जितनी देर है गीली।
.........📝श्रीमती मुक्ता सिंह
जिंदगी तू है बड़ी वेवफा,
खुशियाँ तो मिलती थोड़ी,
गमों से है सजा जहाँ,
ख्वाहिशें तो हसीन हजारों,
पर मुकम्मल जहाँ है थोड़ी,
खुशियों की आहटें हैं धीमी,
गमों का है जहाँ बड़ा।
बहुत खुश थे हम ये जिंदगी,
आँखे मूंदे चल रहे थे मखमली घासों पे,
अचानक से काँटो से छलनी हो गए पांव,
अभी सम्भले भी न थे की ठोकर लगी ,
गिरे तो पथरीली जमीं थी ।
बहुत गुमान था अपने प्यार पे हमे,
पर वो तो था बंद मुट्ठी की रेत,
जिसे जितना संभाले उतना ही फिसले,
बस खुशियाँ हैं मेरी गीली रेत ,
जो बस उतना ही देर मुट्ठी में बंद है,
जितनी देर है गीली।
.........📝श्रीमती मुक्ता सिंह
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