अनोखा है ये दिलों का बंधन
*"अनोखा है ये दिलों का बंधन"*
अनोखा है ये दिलों का बंधन,
सात फेरे,काले मोती और सिंदूर ,
इनसे बंधा है ये अनोखा बंधन,
कुछ मंत्रोच्चार ने दिलों को जोड़े,
पाणिग्रहण की रस्म ने कराया था एहसास,
तेरे पहले स्पर्श का एहसास था अनोखा,
सात फेरे सात वचन में बंध गए हम ।
कैसा है ये अनोखा अनमोल बंधन,
सारी खुशियां मिल गई तुझको पाकर,
जिंदगी संवर गई तेरे पहलू में आकर,
तेरे बिन अब एक लम्हा भी गुजरता नहीं,
मेरे धड़कनों पे भी अब राज तुम्हारा है।
कैसा है ये अनोखा दिलों का बंधन,
गृहस्ती हमारी चल रही थी यूं ही,
रिश्ते बढ़े जिम्मेवारियों बढ़ी,
पर प्यार ना हुआ हमारा कम,
पर जिम्मेवारियों ने लिया ये कैसा पलटन,
ना चाहते हुए भी हम दूर हो रहे हैं,
आहिस्ता आहिस्ता बढ़ रही मजबूरियां,
कैसे रहेंगे हम तेरे बिन हमदम,
कहीं निकल ना जाए प्राण हमारे,
तुम बिन वो हमसफ़र ।
कैसा है ये अनोखा दिलों का बंधन,
अजीब है ये दिलों का भी रिश्ता,
अब तुम और मै ना रहे, होकर हम,
अब तुम ही मेरी जिंदगी हो,
धड़कनों की आवाज भी तुम ही हो,
कैसा है अनोखा हमारा बंधन ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
29/6/19
अनोखा है ये दिलों का बंधन,
सात फेरे,काले मोती और सिंदूर ,
इनसे बंधा है ये अनोखा बंधन,
कुछ मंत्रोच्चार ने दिलों को जोड़े,
पाणिग्रहण की रस्म ने कराया था एहसास,
तेरे पहले स्पर्श का एहसास था अनोखा,
सात फेरे सात वचन में बंध गए हम ।
कैसा है ये अनोखा अनमोल बंधन,
सारी खुशियां मिल गई तुझको पाकर,
जिंदगी संवर गई तेरे पहलू में आकर,
तेरे बिन अब एक लम्हा भी गुजरता नहीं,
मेरे धड़कनों पे भी अब राज तुम्हारा है।
कैसा है ये अनोखा दिलों का बंधन,
गृहस्ती हमारी चल रही थी यूं ही,
रिश्ते बढ़े जिम्मेवारियों बढ़ी,
पर प्यार ना हुआ हमारा कम,
पर जिम्मेवारियों ने लिया ये कैसा पलटन,
ना चाहते हुए भी हम दूर हो रहे हैं,
आहिस्ता आहिस्ता बढ़ रही मजबूरियां,
कैसे रहेंगे हम तेरे बिन हमदम,
कहीं निकल ना जाए प्राण हमारे,
तुम बिन वो हमसफ़र ।
कैसा है ये अनोखा दिलों का बंधन,
अजीब है ये दिलों का भी रिश्ता,
अब तुम और मै ना रहे, होकर हम,
अब तुम ही मेरी जिंदगी हो,
धड़कनों की आवाज भी तुम ही हो,
कैसा है अनोखा हमारा बंधन ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
29/6/19
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