बारिश की बूंदें

   Rewrite

    *बारिश की बूंदे*

रात की गहरी होती खामोशियां,
जैसे स्याह सी निस्तब्धता बढ़ा रही हो,
बारिश की बूंदे भी धीरे से धरती को आगोश में ले रही हैं।

इन बूंदों की भी है अजीब साजिशें,
प्रेमी दिलों मे बेचैनीयां बढ़ा रही हो जैसे,
इस सन्नाटे में तुम्हारी यादों का कारवां,
ठंडी हवा सी तन मन को सिहरा रही हैं,
काश कि तुम इस रात में होते यहां,
मै तेरी बांहों में खुद को भूल जाती,
तेरे प्यार के सुरक्षा कवच में खो जाती,
उस एहसास की शिद्दत से याद आ रही है।

इन बूंदों की भी है अजीब साजिशें,
अपनी बूंदों से प्रेमियों को भिगोती है इस कदर,
वो तड़प जाते हैं रेगिस्तान में मृगमारिचिका सी,
मेरी धड़कनो पे तो तेरे नाम का यूं पहरा है,
कि मेरी सांसों में भी तेरी खुशबू बसती है,
फिर सोचती हूं क्या तुम भी तड़पते हो मेरी तरह,
क्या ये बूंदे तेरे दिल में भी टीस भर जाती हैं,
पर कहा गया है प्यार तो निस्वार्थ होता है।

बारिश की बूंदों और यादों का है गहरा नाता,
वो धीरे से बरसती हैं और प्रेमी तड़पते हैं,
तुम खुश रहो सदा ये दुआ है मेरी,
तुम याद करो ना करो नहीं हैं बंदिशें,
मैंने तो मांग लिया तुझे जन्मों - जन्मों के लिए,
मेरी शुरुआत भी तुमसे अंत भी तुमपे,
मेरी धड़कन भी तुम,और उसकी तड़प भी तुम,
मेरी शिकवा भी तुमसे,और शिकायत भी तुम,
मेरे इश्क भी तुम, और उसकी बंदगी भी तुम,
मेरे वजूद की तलब भी तुम, और रूह का सफर भी तुम,
मेरे दिल के हुकूमत के हुक्मरान,इल्तज़ा है इतनी
कि यादों के समंदर में गहराइयों का अंदाजा ना लगा,
मेरी खामोशियों के तले तूफान बसते हैं,
मेरे इश्क की शोहरत है इतनी,
कि लोग मुझसे पहले तेरा नाम लेते हैं।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
2/6/2020





Comments