बीते हुए लम्हों की कसक

"बीते हुए लम्हों की कसक"

बीते हुए लम्हों की कसक आज भी है,
तुम मिले नहीं इसकी कसक आज भी है,
ख्वाबों में ही हो जाए मुलाकात शायद,
टूटे हुए दिल में यह आस आज भी है ।

हमारे प्यार के चंद लम्हे जो यादें बन गए,
उन यादों की जंजीरों का पहरा आज भी है,
कभी तो याद आएगी हमारी मुलाकातें,
इस याद के आसरे का कसक आज भी है,
बीते हुए लम्हों की कसक आज भी है।

बीते हुए लम्हों की वो खूबसूरत यादें,
तुमसे हुई वो मुलाकातें याद बन गयी अब,
 उन यादों की महफिलें आज भी सजती है,
बीते हुए लम्हों के यादों के मयखाने में,
सजदे में हम आज भी पलकें बिछाते हैं,
उन लम्हों के स्वागत के आरज़ू की जुस्तजू में,
बीते हुए लम्हों की कसक आज भी है।

गुजरे हुए अफसानें याद आती हैं बहुत,
तुम्हारी वो धीरे से मुस्काने की अदा ,
सखियों संग जाते तिरछी नज़रों से देखना,
थोड़ा रुक कर पेप्सी की वो बोतल लेना,
और पैसे देते हुए एक नज़र देख लेना,
उन लम्हों की यादों का कसक आज भी है।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
23/8/19

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