दिल तुम्हारा भी तो धड़का था


"दिल तुम्हारा भी तो धड़का था"

तू मेरे जिंदगी में उस वक्त आई जब मै तन्हा था, रुस्वा था जमाने से,
अनमने से पहुंचा था यूनिवर्सिटी जब एडमिट कार्ड लेने,
पहली दफा तेरी फ़ोटो देख अपनापन सा महशुस हुआ था,
ना जाने क्या थी तेरी आँखों में जो सीधे दिल में उतर गयी थी,
मै क्या जानता था की ये पढाई का नहीं जिंदगी की परीक्षा थी,
जब हमारी नज़रें मिली थी पहली बार दिल जोर से धड़का था,
तुमने जो मुझसे नज़र मिलाई थी दिल तो तुम्हारा भी धड़का था,
तुम भले ही इंकार करो तेरे चेहरे की लाली ने सारा राज़ खोला था,
जैसे जैसे नजदीक आ रहे थे मेरे कदम हमदोनो का दिल धड़का था,
वो परीक्षा नहीं थी मेरे जीवन की एक सुहानी सवेरा थी,
जिसकी किरणे बन कर तुम मुझे प्यार के सागर में नहलाई थी,
आज भी मै वही खड़ा हूँ तेरे इंतज्जार में ,फिर से दिख जाये तू कहीं,
लगता है कि काश वो पल रुक गया होता वहीँ कुछ तुम कहते कुछ हम,
तेरे प्यार की लाली से सराबोर वो चेहरा आज भी नहीं भुला हूँ मै,
दिन बदले रिश्ते बंधे नए रिश्तों में पर तेरी यादों का पहरा न गया,
आज भी तू धड़कती है मेरे दिल में मेरी सांसे बनकर,
आज भी इंतज्जार रहता है कि, कही से तो तू पुकार दे ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
9/4/19

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