माँ तेरी बांहों में
*माँ तेरी बांहों में*
माँ!
आज भी बांहे फैलाये जब तुम समेटती हो मुझे,
लगता है जैसे सारा संसार मिल गया हो मुझे,
जिंदगी का हर सबक तुमसे ही सीखा मैंने,
मेरे सपनो को भी रंग भरा है तुमने,
मेरी खामोशियों को भी तुम सुन लेती हो धीरे से,
आज भी तुम थकी सी थी बैठी थोड़े अनमने से,
पर जब अपनी बाँहो में मुझे समेटा तुमने,
एक सुखद मुस्कान खिल उठी तेरे चेहरे पर,
उस पल लगा जैसे स्वर्ग हो यहीं माँ तेरी बाँहों में,
दुनिया की हर तपिश में शीतल छाया तेरी बाँहें देती हैं
माँ तेरी करुणा है न्यारी,नित नयी शक्ति देती है,
बन अमृत का सागर हर गम को समेट लेती हो,
आज भी बांहे फैला मुझको छोटा सा बच्चा बनाती हो
माँ आज भी बांहे फैलाये जब तुम समेटती हो मुझे,
लगता है जैसे सारा संसार मिल गया हो मुझे।
जिंदगी का हर लम्हा तुमसे गुलज़ार है ,
तुमसे ही मेरा वजूद और मेरी शख्सियत है,
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज झारखंड
14/4/19
माँ!
आज भी बांहे फैलाये जब तुम समेटती हो मुझे,
लगता है जैसे सारा संसार मिल गया हो मुझे,
जिंदगी का हर सबक तुमसे ही सीखा मैंने,
मेरे सपनो को भी रंग भरा है तुमने,
मेरी खामोशियों को भी तुम सुन लेती हो धीरे से,
आज भी तुम थकी सी थी बैठी थोड़े अनमने से,
पर जब अपनी बाँहो में मुझे समेटा तुमने,
एक सुखद मुस्कान खिल उठी तेरे चेहरे पर,
उस पल लगा जैसे स्वर्ग हो यहीं माँ तेरी बाँहों में,
दुनिया की हर तपिश में शीतल छाया तेरी बाँहें देती हैं
माँ तेरी करुणा है न्यारी,नित नयी शक्ति देती है,
बन अमृत का सागर हर गम को समेट लेती हो,
आज भी बांहे फैला मुझको छोटा सा बच्चा बनाती हो
माँ आज भी बांहे फैलाये जब तुम समेटती हो मुझे,
लगता है जैसे सारा संसार मिल गया हो मुझे।
जिंदगी का हर लम्हा तुमसे गुलज़ार है ,
तुमसे ही मेरा वजूद और मेरी शख्सियत है,
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज झारखंड
14/4/19
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