सुकून की तलाश में

"सुकून की तलाश में"

जिंदगी में सुकून की तलाश में,
हम कहां से कहां आ गए,
बचपन बीता, दोस्त छूटे,
रिश्तों के मर्यादाओं के मायने बदले,
खुशियों के रंग बदले,
जिंदगी के ढंग बदले,
लोगों की नज़रों के पैमाने बदले।

हम बदले, सुकून की तलाश में ,
अब तो बस ये शब्द ही सहारा है,
भावनाओं को कलमबद्ध कर लेती हूं,
खुशियों को जी लेती हूं जी भर के,
गमों को से इश्क़ कर लेती हूं,
क्यूंकि कागज पे शब्दों को पिरो लेती हूं ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
7/3/2020

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