मां का प्यार
"मां तेरे प्यार को क्या नाम दूं"
मायके की दहलीज है सबसे निराली,
मां की गोद है जन्नतों से भी प्यारी,
उन आंखो के प्यार को क्या नाम दूं,
मां के हाथों के नरम स्पर्श को क्या नाम दूं,
जो धीमे से फिसलते हुए,आंक लेती हैं सब,
मेरे हर दर्द और खुशी को भांप लेती हैं,
मां के उस अनोखे प्यार को क्या नाम दूं ।
मां आज भी जब सीने से तुम हो लगाती,
एक अनोखा सुकून मिलता है दिल को,
उस दिल के अनोखे सुकून को क्या नाम दूं,
नज़रे हैं तेरी, या है एक अनोखा पैमाना,
मेरे चेहरे के हर भावों को पढ़ लेती हो,
बोलने से पहले ही सब हाज़िर कर देती हो,
मेरी हर खुशियां जमाने से चुरा लाती हो,
तेरी उन आंखों के पैमाने को क्या नाम दूं।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
20/1/2020
मायके की दहलीज है सबसे निराली,
मां की गोद है जन्नतों से भी प्यारी,
उन आंखो के प्यार को क्या नाम दूं,
मां के हाथों के नरम स्पर्श को क्या नाम दूं,
जो धीमे से फिसलते हुए,आंक लेती हैं सब,
मेरे हर दर्द और खुशी को भांप लेती हैं,
मां के उस अनोखे प्यार को क्या नाम दूं ।
मां आज भी जब सीने से तुम हो लगाती,
एक अनोखा सुकून मिलता है दिल को,
उस दिल के अनोखे सुकून को क्या नाम दूं,
नज़रे हैं तेरी, या है एक अनोखा पैमाना,
मेरे चेहरे के हर भावों को पढ़ लेती हो,
बोलने से पहले ही सब हाज़िर कर देती हो,
मेरी हर खुशियां जमाने से चुरा लाती हो,
तेरी उन आंखों के पैमाने को क्या नाम दूं।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
20/1/2020
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