किस्मत भी क्या खेल दिखाती है

"किस्मत भी क्या खेल दिखाती है"

किस्मत भी क्या खेल दिखाती है,
सावन में पतझड़ लाती है,
हर चेहरे पे है मुखौटे सजे,
मुस्कराते हुए यूं खड़े हैं जैसे,
चेहरे पे हंसी हाथों में हैं खंजर लिए।

किस्मत भी क्या खेल दीखाती है,
दिल की गहराइयों से जिसे भी चाहा हमने,
वही बना जख्मे दिल का सबब,
हर रिश्ता नाता, अब है बस एक दिखावा,
एक चेहरे पे कई चेहरे लगाए बैठे हैं सभी।

किस्मत भी क्या खेल दिखाती है।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
13/3/2020

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