जिंदगी नहीं आसां

जिंदगी नहीं आसां"

जिंदगी इतनी आसां नहीं होती...

हर कदम पर कांटे बिछे हैं....

फुल बनकर निकल जाना है...

हर जगह कीचड़ है, पर कमल बन निकलना है...

हर रास्ते पर भेड़िये हैं..नजरें बचा कर निकल जाना है...

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज

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