इस मां को नमन

"इस मां को नमन"

16 दिसम्बर की वो भयावह रात,
याद कर सिहर जाते हैं हम,
निर्भया पे क्या बीती होगी,
जब दरिंदों ने नोचा होगा,
आत्मा को भी किया होगा लहूलुहान,
शरीर के साथ रूह भी कांपी होगी।

20 मार्च को निकला न्याय का सवेरा,
भारत की बेटियों के स्वाभिमान का सवेरा,
निर्भया के तड़प की इंसाफ का सवेरा,
उस मां के इंतज़ार खत्म होने का सवेरा,
आज निर्भया भी आसमां से मुस्कराई होगी।

कभी जज नहीं आते, तो कभी वकील,
कभी दुहाइयां, तो कभी माफीनामा,
तारीखों पे तारीखें पड़ती रही,
पर ना छूटा उस मां की न्याय का आस,
तारीखें पड़ती रही दरिंदे मुस्कराते रहे,
पर इस मां ने ना छोड़ी आस का दामन।

इस बहादुर मां को नमन,
जिसने ना ली फीस एक रुपए,
इस निस्वार्थ भाव को नमन,
इस न्यायपालिका को नमन।🙏

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
20/3/2020

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