महाराणा प्रताप

"वीर महाराणा प्रताप"

ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को लियो जन्म एक वीर सपूत,
आशीष लुटाई थी माता ज्यवंता कुंवर ने कुंभलगढ़ में,
हर्षित हुए महाराणा उदय प्रताप,
हर्षित हुआ उदयपुर मेवाड़ में, सिसोदिया राजवंश,
हुई थी हर्षित धरा, देवों ने बजाया था दूदुंभी,
इतिहास ने भी माना था लोहा जिसका ,
दृढ़ प्रण और साहस का, येसा धनी था वह वीर,
निरंतर वर्षों तक किये थे दांत खट्टे जिसने मुगलों के,
जिसने अपनी शक्ति और बुद्धि से दुश्मनी कि नींद उड़ाई थी,
उस वीर की मृत्यु पे दुश्मनों ने भी आंसू बहाए थे,
जिनकी बहादुरी के किस्से आज भी देशभक्ति के जोश जगाते हैं,
येसे थे हमारे देश के वीर सपूत महाराणा प्रताप ।

गद्दारों के षडयंत्रों ने महलों से जंगलों में पहुंचाया था,
घास की रोटी ने भी, प्रताप के इरादों को ना डिगाया था,
अपनों ने जब छल्ला, भीलों ने महाराणा का साथ निभाया था,
युद्ध के लिए सैनिकों के लिए भामाशाह ने भी खोला था तिजोरी,
महाराणा का साथ निभा भामाशाह इतिहास में बना अमर,
हल्दी घाटी युद्ध में भाई बना विभीषण, झाला ने साथ निभाया था,
मुगल दूर से महाराणा के मुकुट देख लगा रहे थे निशाना,
सरदार मन्नाजी झाला ने मुगलों के इस कुकृत्य को लिया भांप,
और महाराणा का मुकुट पहन,जान बचाई थी प्रताप की,
बहुत प्रिय शहीद हुए इस स्वाभिमान की लड़ाई में,
वीर चेतक भी साथ छोड़ दिया, महाराणा का इस लड़ाई में,
फिर भी हौसले रहे बुलंद वीर महाराणा प्रताप के,
दुश्मनों के आगे ना रुके ना झुके, ना स्वाभिमान को त्यागें,
येसे थे हमारे देश के वीर सपूत महाराणा प्रताप ।

जय हिंद जय महाराणा 🙏

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
19/1/2020

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