यादों का कारवां
"धुंधली पड़ी,उजली यादों का कारवां"
आज नज़रों से गुजरी एक तस्वीर सुनहरी,
कुछ धुंधली पड़ी,उजली यादों का कारवां,
और कुछ समय की परतों में दबा सवेरा,
यादें दर यादें का खुलता रहा फ़लसफ़ा ।
कहकहों से खुशगवार होती थी वो यादें,
ना समय था प्रहरी, ना मंजिलों की बंदिशें,
बस दोस्तों के खुशी में मिलती थी मंजिलें,
समय ने करवट बदली, बदली खुशियां,
बदले आशियां, बदले मंजिलों का दास्तां,
बदले धुंधली पड़ी उजली यादों का कारवां।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
22/8/19
आज नज़रों से गुजरी एक तस्वीर सुनहरी,
कुछ धुंधली पड़ी,उजली यादों का कारवां,
और कुछ समय की परतों में दबा सवेरा,
यादें दर यादें का खुलता रहा फ़लसफ़ा ।
कहकहों से खुशगवार होती थी वो यादें,
ना समय था प्रहरी, ना मंजिलों की बंदिशें,
बस दोस्तों के खुशी में मिलती थी मंजिलें,
समय ने करवट बदली, बदली खुशियां,
बदले आशियां, बदले मंजिलों का दास्तां,
बदले धुंधली पड़ी उजली यादों का कारवां।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
22/8/19

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