चलते चलते कहां आ गए
"चलते कहां आ गए"
चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे दूर हो गए,
जो अजनबी थे हमसफ़र हो गए,
आज भी है उनका इंतज़ार आंखो में,
जो कभी दिल के करीब थे,
आज भी यादें ताज़ा हो जाती है ,
जब सुन लूं किसी से नाम उनका,
पर वो तो अजनबी हो गए ।
चलते चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे किसी के नूर हो गए,
अब अजनबी हमसफ़र हमख्याल हो गए,
दिल की गलियों में उनकी खुशबू आज भी है,
यादों में तस्वीरें आज भी बोलती हैं,
आंखे उठाना पलकें गिराना याद आज भी है,
गुस्से की वो लाली आज भी याद है,
जो ख्यालों को आज भी सुर्ख कर जाती है।
चलते चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे आज किसी के हमनवां हो गए ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
21/7/19
चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे दूर हो गए,
जो अजनबी थे हमसफ़र हो गए,
आज भी है उनका इंतज़ार आंखो में,
जो कभी दिल के करीब थे,
आज भी यादें ताज़ा हो जाती है ,
जब सुन लूं किसी से नाम उनका,
पर वो तो अजनबी हो गए ।
चलते चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे किसी के नूर हो गए,
अब अजनबी हमसफ़र हमख्याल हो गए,
दिल की गलियों में उनकी खुशबू आज भी है,
यादों में तस्वीरें आज भी बोलती हैं,
आंखे उठाना पलकें गिराना याद आज भी है,
गुस्से की वो लाली आज भी याद है,
जो ख्यालों को आज भी सुर्ख कर जाती है।
चलते चलते कहां आ गए हम,
जो दिल में थे आज किसी के हमनवां हो गए ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
21/7/19
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