जिन्दगी किस मोड़ पे लाई है

"जिन्दगी किस मोड़ पे लाई है "

जिन्दगी भी किस मोड़ पे लाई है ,
चारों ओर बस छलावे ही छलावे हैं,
अपनों के चेहरे में बस अजनबी ही हैं,
ढूंढ़ते हैं अनजाने से अपनों में अपना कोई।

जिन्दगी भी किस मोड़ पे लाई है ,
देखूं तो लगता है सब है मेरे सतरंगी सपने,
पास जाऊं तो अजनबी बन जाते हैं सब
क्यूंकि सपना तो कभी होता नहीं अपना।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
11/6/19

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