हंसते मुस्कराते पल
*हंसते मुस्कराते पल*
हंसते मुस्कराते कुछ पल
हंसते मुस्कराते कुछ अपने
यूंही चले आए थे कुछ अपने
जो भीड़ में थे कहीं गुम कब से
आज यूं ही भीड़ से निकल आए थे अपने ।
पल का मिलना जैसे वर्षों का था बिछुड़न
यूं आत्मीयता से मिले थे कुछ अपने
जैसे वो समय के मोहताज नहीं थे
समय इंतज़ार कर रहा था इस पल का।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
7/2/2020
हंसते मुस्कराते कुछ पल
हंसते मुस्कराते कुछ अपने
यूंही चले आए थे कुछ अपने
जो भीड़ में थे कहीं गुम कब से
आज यूं ही भीड़ से निकल आए थे अपने ।
पल का मिलना जैसे वर्षों का था बिछुड़न
यूं आत्मीयता से मिले थे कुछ अपने
जैसे वो समय के मोहताज नहीं थे
समय इंतज़ार कर रहा था इस पल का।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
7/2/2020
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