जिंदगी चल रही थी यूं ही
"जिंदगी चल रही थी यूं ही"
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
दौड़ती, भागती, जिद्दी सी,
हंसती, मुस्कराती, इठलाती सी,
ठिठके से कुछ पल भी थे,
कुछ पल थे उदासी के भी,
आए थे यूं ही अनमने मेहमान से ।
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
ठोकरों का कारवां था रास्ते में,
मंजिल पे जाना भी था,
थोड़ी दूर चलते संभलते से,
पर संभलने से पहले ही लग जाती थीं ठोकरें,
अभी सबक सीखा ही था ये जिंदगी,
कि नया सबक सीखाने को तैयार था जमाना ।
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
मंजिलों पे थी नज़रें हमारी,
दृढ़ निश्चय था हमारा अडिग,
सारी मुश्किलें लग रही थी बौनी,
क्यूंकि मंजिल था हमारा हिमालय सा।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
3/3/2020
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
दौड़ती, भागती, जिद्दी सी,
हंसती, मुस्कराती, इठलाती सी,
ठिठके से कुछ पल भी थे,
कुछ पल थे उदासी के भी,
आए थे यूं ही अनमने मेहमान से ।
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
ठोकरों का कारवां था रास्ते में,
मंजिल पे जाना भी था,
थोड़ी दूर चलते संभलते से,
पर संभलने से पहले ही लग जाती थीं ठोकरें,
अभी सबक सीखा ही था ये जिंदगी,
कि नया सबक सीखाने को तैयार था जमाना ।
जिंदगी चल रही थी यूं ही,
मंजिलों पे थी नज़रें हमारी,
दृढ़ निश्चय था हमारा अडिग,
सारी मुश्किलें लग रही थी बौनी,
क्यूंकि मंजिल था हमारा हिमालय सा।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
3/3/2020
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