कवि हो कविता लिखती हो

क्या खूब कहा किसी ने आज मुझसे,

कवि हो कविता लिखती हो,

पर श्रोता समझते हैं की तुम क्या लिखती हो,

मेरी कविता तो एक खुली किताब है,

जो जैसे समझे वैसा हिसाब है,

मैंने तो बस शब्दों को पिरोना सीखा है🙏।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज


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