खुद को फ़ना कर दिया

"खुद को फ़ना कर दिया"

क्या खूब कहा है किसी ने
"किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता
कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता।" तेरी खुशी के लिए खुद को फ़ना कर दिया,
तुम्हे चाहा इतना कि तुझे खुदा बना दिया,
प्रेम की डगर पे मिला तन्हाइयों का तोहफा,
टूटा दिल मेरा येसा तेरी बातों से ये बेखबर,
जैसे ख्वाबों की मोती बिखरे हो दर बदर,
साथ चलते हो एक नदी के किनारे की तरह
चलते तो साथ हो पर मिलते नहीं ।

तेरी चाहतों में खुद को फ़ना कर दिया,
तेरी ख़ुशी पे खुद को तुझसे जुदा कर दिया,
तुम सच ही कहते हो तेरे लिए पागल हूं मैं,
बहुत समझाया दिल को पर ये तो पागल है,
तुम्हे मेरा साथ एकपल भी गवारा नहीं,
फिर फर्ज क्यूं निभाते हो रिश्तों के बंधनों में,
जा ये दिल के परिंदे तुझे आजाद करती हूं।

तेरी चाहतों में खुद को फ़ना कर दिया,
एक दिन तुम भी गुजरोगे उस रहगुजर से,
मेरी जगह कल तेरा भी वो ठिकाना होगा,
बस मै नहीं होऊंगी, बाकी सारा जहां होगा,
मैंने तो अब तेरे दर्द से भी इबादत कर लिया,
मैंने तो तेरी बंदगी को खुदा बना लिया है,
तू साथ निभाए या ना निभाए बंधन नहीं,
धीरे से ये दिल को समझा लिया है ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
23/4/2020





Comments