दीप आशा की

"दीप आशा की"

मां भारती, मां भारती, मां भारती,
देखो चहुं ओर फैली है निराशा की निशा,
आज देखो इस विपदा की घड़ी में,
जब चारों ओर घनघोर  निराशा की निशा,
दे शक्ति मां हम एक हो और नेक हो,
इस निशा में जलाएं हम एक दीप आशा की ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंकाराज
5/4/2020

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥

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