दर्द गूंजता है
*दर्द गूंजता है*
जब भी तुम किस्सा उसका सुनाते हो,
होठों पे हंसी और दिल में दर्द गूंजता है,
और एक आस लिए हम मुस्कराते हैं,
स्याह रात के बाद दिन का उजाला है।
तुम्हे तो खबर भी नहीं हमारे दर्द-ए-गम का,
क्यूंकि तुम तो खोए हो किसी की यादों में,
ज़बान करती रहती हैं बाते उसकी ,
चेहरे पे मुस्कान खिली है उसके नाम का।
हम तो बस यही सोच खुश हो लेते हैं,
तेरी खुशियों में अपनी खुशी ढूंढ लेते हैं,
हम ना सही चलो तुम तो खुश हो,
चाहे खुशियां हो किसी और के नाम का।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
11/5/2020
जब भी तुम किस्सा उसका सुनाते हो,
होठों पे हंसी और दिल में दर्द गूंजता है,
और एक आस लिए हम मुस्कराते हैं,
स्याह रात के बाद दिन का उजाला है।
तुम्हे तो खबर भी नहीं हमारे दर्द-ए-गम का,
क्यूंकि तुम तो खोए हो किसी की यादों में,
ज़बान करती रहती हैं बाते उसकी ,
चेहरे पे मुस्कान खिली है उसके नाम का।
हम तो बस यही सोच खुश हो लेते हैं,
तेरी खुशियों में अपनी खुशी ढूंढ लेते हैं,
हम ना सही चलो तुम तो खुश हो,
चाहे खुशियां हो किसी और के नाम का।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
11/5/2020

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