फुर्सत नहीं है

*फुर्सत नहीं है*

तुम मशरूफ हो अपनी तन्हाइयों में,
और दिखावा करते हो महफिलों का,
आज भी किसी की यादें सताती हैं तुझे,
दिल रोता है तेरा गमों के अंधेरे में,
और सबसे कहते हो फिर भी फुर्सत नहीं है।

भरी महफिलों में करते हो इंतज़ार ,
आह्टों पे नज़रें जमाए किसी का,
बेचैन दिल में लिए याद किसी का,
सबसे उदासियां छुपाए मुस्कराते हो,
और कहते हो फिर भी फुर्सत नहीं है।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
13/5/2020

Comments