दिल लिए फिरते हो

*दिल लिए फिरते हो*
कमी कहां रही मेरे इश्क ए इबादत में,
तुम यूं दिलफेंक बने फिरते हो,
तेरे क़दमों में मेरा सारा जहां है,
और तुम बेगानी गलियों में लिए फिरते हो दिल अपना।

क्या सुना नहीं तुमने ये किस्सा मशहूर कितना,
बेगानो से प्यार नहीं मिलता,
बस डर है इतना, कहीं टूट ना जाए दिल तेरा,
क्यूंकि तेरा दर्द भी तो है, दर्द मेरा अपना ।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
11/5/2020



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