मालूम नहीं था

           *मालूम नहीं था*
मालूम नहीं था कि तुम यूं मिलोगी एक दिन
नज़रें मिलते ही इश्क हो जाएगा तुमसे
वो सुर्ख गुलाबी तेरे अक्स आज भी छेड़ते हैं
उसपे तेरी वो चुपके से नज़रे मिला झुकाना
आज भी चेहरे पे मुस्कान ले आते हैं मेरे ।

मालूम नहीं था कि ये दिन भी आएगा
तुम हमे यूं इश्क के समंदर में छोड़ जाओगे
मेरे इश्क के कब्र पे हसीन दुनिया बसाओगे
अब इस घायल आशिक़ की यही है दुआ
तुम खुश रहो अपने जन्नते जहां में।

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
17/5/2020


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