निष्ठुर था वक्त

    *निष्ठुर था वक्त*
वक्त रोकना चाहा था हमने उस लम्हे में
जब एक पल मिल कर बिछुड़े तुम
आवाजें भी दी पर निष्ठुर था वक्त हमारा
बिछड़ गए हम सदा के लिए एक होकर

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
20/5/2020

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