मां तेरी गोद में
*मां तेरी गोद में*
मां आज फिर वो चाहते जगी है,
तेरी गोद में सर रख सो जाऊं,
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊं,
गमों को भूल तेरी गोद में सुकून पाऊं,
मां के लबों पे कभी बद्ददुआ नहीं होती,
जग ख्फा हो जाए पर मां खफा नहीं होती,
वो तो सोती है तो ख्वाबों में भी दुआ देती है,
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊं,
तुझसे लिपट तेरी गोद में सो जाऊं ,
गमों को भूल तेरे आगोश में जन्नत पाऊं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/5/2020
मां आज फिर वो चाहते जगी है,
तेरी गोद में सर रख सो जाऊं,
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊं,
गमों को भूल तेरी गोद में सुकून पाऊं,
मां के लबों पे कभी बद्ददुआ नहीं होती,
जग ख्फा हो जाए पर मां खफा नहीं होती,
वो तो सोती है तो ख्वाबों में भी दुआ देती है,
दिल करता है फिर से बच्चा बन जाऊं,
तुझसे लिपट तेरी गोद में सो जाऊं ,
गमों को भूल तेरे आगोश में जन्नत पाऊं ।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
10/5/2020



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