समय की रेत
*समय की रेत फिसलती हुई*
मुट्ठी से समय की रेत फिसलती हुई सी जा रही है
जिंदगी को समझते- समझते उम्र निकलती सी जा रही है
मंजिले दूर खड़ी मृगमारिचिका सी चिढ़ाती हैं हमें
अपनो को सवांरते- संवारते वेगाने से बन बैठे हैं हम
दूर कहीं खड़ी कामयाबियों की मंजिलें बुला रही हैं हमें
और कर्तव्य पैरों में बेड़ियां डाले मुस्करा रही हो जैसे
मैंने भी हंसकर कहा मंजिलों से कर्तव्यों से बड़ी नहीं कामयाबियां
रेत पे तो नाम लिख दूं मैं पर समय की आंधी उड़ा ले जाएगी
क्यूंकि रेत तो आधीन है उन हवाओं और लहरों की
तो क्यूं ना मै समय की रेत को रिश्तों के अहशाशों से भिगो दूं
और भीगी हुई रेत को मुट्ठियों में भर जी लूं।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020
*थोड़े से सुख के लिए*
थोड़े से सुख के लिए क्या पाया और क्या गंवाया
आज देख लो सड़कों को नापते इन लड़खड़ाते नंगे पैरों को
जीवन की आस में मौत की तरफ बढ़ते इस रेले को।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020
*आराम करो आराम का दिन है*
आज बड़े प्यार से जब तुमने कहा था मुझे
आज आराम करो आराम का दिन है
तो दुनिया की हर खुशी मिल गई थी मुझे
तुम्हारे इस प्यार भरे अहशाशों के शब्दों से।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020
मुट्ठी से समय की रेत फिसलती हुई सी जा रही है
जिंदगी को समझते- समझते उम्र निकलती सी जा रही है
मंजिले दूर खड़ी मृगमारिचिका सी चिढ़ाती हैं हमें
अपनो को सवांरते- संवारते वेगाने से बन बैठे हैं हम
दूर कहीं खड़ी कामयाबियों की मंजिलें बुला रही हैं हमें
और कर्तव्य पैरों में बेड़ियां डाले मुस्करा रही हो जैसे
मैंने भी हंसकर कहा मंजिलों से कर्तव्यों से बड़ी नहीं कामयाबियां
रेत पे तो नाम लिख दूं मैं पर समय की आंधी उड़ा ले जाएगी
क्यूंकि रेत तो आधीन है उन हवाओं और लहरों की
तो क्यूं ना मै समय की रेत को रिश्तों के अहशाशों से भिगो दूं
और भीगी हुई रेत को मुट्ठियों में भर जी लूं।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020
*थोड़े से सुख के लिए*
थोड़े से सुख के लिए क्या पाया और क्या गंवाया
आज देख लो सड़कों को नापते इन लड़खड़ाते नंगे पैरों को
जीवन की आस में मौत की तरफ बढ़ते इस रेले को।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020
*आराम करो आराम का दिन है*
आज बड़े प्यार से जब तुमने कहा था मुझे
आज आराम करो आराम का दिन है
तो दुनिया की हर खुशी मिल गई थी मुझे
तुम्हारे इस प्यार भरे अहशाशों के शब्दों से।
श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
24/5/2020



Nice
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