हम हैं पत्रकार

   *हम हैं पत्रकार*

30 मई 1826 को मिला देश को नया तलवार
उदन्त मार्तण्ड बना वो हथियार
पंडित युगल किशोर शुक्ल को
राजा राम मोहन ने दिया सहयोग
बंगाल बनी पत्रकारों की कर्मभूमि
अंग्रेजो के लिए बने मुसीबत
भारत के लिए बने वरदान ।

तभी तो आज गर्व से कहते हैं हम
देश का चौथा स्तंभ हैं हम
हम हैं एक पत्रकार
हम देश चलाने को देते कई बलिदान
अनजानी राहों में भी नहीं डरते
सच्चाई की खोज में निकल पड़ते कई बार
धन से वंचित सरस्वती की करते आराधना ।

सीमा पे गोलियों की बरसात हो
या देश के गद्दारों के इट्टे - पत्थर
या हो कोई देश पे पड़ी आपदा भारी
नहीं हटते अपने कर्तव्य पथ से
येसे हम हैं पत्रकार ।

हमारे देश के सभी निर्भीक पत्रकारों को समर्पित 🙏 जय हिन्द, जय भारत🙏

श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
30/5/2020

Comments