दोस्ती तोड़कर

        *दोस्ती तोड़कर*

मन में अजीब सी उलझने उठ रही हैं
तुझे माफ़ करके भी ना जाने कैसी बेचैनी है
कभी तुम मेरे दिल-ए-नूर थे ये दोस्त
आज तेरे नजदीकियों से भी घबरा रही हूं।

दोस्त हमे दो जिस्म एक जान बुलाते थे कभी
आज तेरी हंसी में भी फरेब नज़र आता है मुझे
ये दिल आज भी इस क़दर गुलाम है तेरा, कि
तेरी एक मुस्कराहट पे न्योछावर हुए जाते हैं।

मैंने तो सिर्फ तुमसे ही दिल लगाया था,
पर तुम तो कपड़ों की तरह बदलते हो दोस्त
मै तेरी दोस्ती के रंग में रंगी थी इस क़दर
कि हर रंग छू कर मुझे हो जाता था बेअसर 
पर तूने मुझे जमाने के हर रंग के दिखाए तेवर।

तुझपे हर रंग निखरा,सिर्फ मेरा ही रंग रहा बेअसर मैंने तुमसे दोस्ती निभाई हर रिश्ते को तोड़ कर
और तूने तो हर रिश्ते निभाए दोस्ती तोड़कर।


श्रीमती मुक्ता सिंह
रंका राज
28/5/2020

Comments

  1. अहा!👌👌
    तूने हर रिश्ते निभाए दोस्ती तोड़कर!!
    स्ट्रांग उलाहना दे दिया आपने। :) 👍

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